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आर्य महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, शाहजहाँपुर

प्रगति पथ पर अग्रसर

शाहजहाँपुर नगर के मध्य सदर बाज़ार में स्थित यह महाविद्यालय जनपद में महिलाओं की उच्च शिक्षा की एकमात्र संस्था है। आर्य महिला डिग्री कॉलेज का ध्येय वैदिक परम्पराओं में छात्राओं का शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक उत्थान करना, उनमें आत्म-सम्मान, देश-प्रेम व राष्ट्रीय एकता की भावना जागृत करना तथा ऐसी शिक्षा एवं वातावरण प्रदान करना है जिससे वे अपने भारतीय ज्ञान एवं रोजगारपरक, व्यावसायिक शिक्षा से ओतप्रोत भारतीय संस्कृति से जुड़े गुणों का विकास कर सकें।

वर्ष 1984 में स्थापना के बाद ही इस महाविद्यालय का शैक्षिक स्तर उत्कृष्टता का रहा है। विकास की गति पर अग्रसर होता हुआ यह महाविद्यालय स्नातकोत्तर शिक्षा का केन्द्र बना। छात्राओं के लोकप्रिय विषयों के साथ कला संकाय संचालित है। उत्कृष्ट छात्राओं के लिए विज्ञान की शिक्षा के अभाव को दूर करने के लिए बी.एससी. की कक्षाएँ संचालित होने के साथ महिलाओं में व्यावसायिक दृष्टिकोण एवं उद्यमिता कुशलता विकसित करने हेतु बी.कॉम. की कक्षाएँ प्रारम्भ की गयी। इसके अतिरिक्त महाविद्यालय में एम.ए. तीन विषयों से (अर्थशास्त्र, अंग्रेज़ी एवं समाजशास्त्र), एम.कॉम. एवं एम.एससी. (रसायन विज्ञान) तथा बी.कॉम. स्नातक स्तरीय शिक्षा पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं।

प्रशासनिक भवन के भूतल पर विभिन्न विषयों की उत्कृष्ट पुस्तकों से सुसज्जित पुस्तकालय है। प्रथम तल पर शिक्षण हेतु विभिन्न कक्षाएँ तथा छात्राओं को कम्प्यूटर का ज्ञान देने के लिए आधुनिक कम्प्यूटर लैब है। महाविद्यालय में स्थान सीमित होते हुए भी बहुमंजिला भवन बनाकर इस कमी को दूर करने का प्रयास किया गया है। महाविद्यालय के द्वितीय तल पर ऑडियो-विजुअल सुविधाओं से युक्त वाणिज्य संकाय एक सभागार भी है।

महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना, एन.एस./स्काउट की इकाइयाँ संचालित हैं। राष्ट्रीय सेवा योजना के अन्तर्गत 200 छात्राओं का आवंटन है, जिसमें छात्राओं द्वारा मलिन बस्तियों में 07 दिवसीय शिविर, जनजागरण अभियान, श्रमदान एवं महिला उत्थान आदि के कार्यक्रम संचालित किये जाते हैं।

महाविद्यालय में समय-समय पर विभिन्न प्रतियोगिताओं, वाद-विवाद, खेलकूद प्रतियोगिताओं एवं ज्वलन्त विषयों पर सेमिनारों का आयोजन किया जाता है।

महाविद्यालय विगत कई वर्षों से नैक द्वारा अपना मूल्यांकन कराने हेतु प्रयासरत है और शीघ्र ही मूल्यांकन कार्य सम्पन्न हो जायेगा। महाविद्यालय में योग्य प्रबन्धकों द्वारा परिश्रमपूर्वक अध्ययन कार्य किया जाता है जिसके फलस्वरूप महाविद्यालय के विभिन्न संकायों एवं कक्षाओं में निरन्तर अति उत्तम परीक्षाफल प्राप्त हो रहे हैं।



हमारा उद्देश्य

महाविद्यालय प्रशासन का यह प्रयास है कि छात्राओं के हित में वह सभी योजनाएं संचालित की जाएं जिनका लाभ छात्राएं इस जनपद में प्राप्त नहीं कर पा रही हैं। महाविद्यालय छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए सदैव प्रयासरत रहेगा।

प्राचार्य की कलम से

भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge System) हमारी प्राचीन परंपरा, संस्कृति और विज्ञान का महत्वपूर्ण आधार है। इसमें ज्ञान, विज्ञान, विचार, दर्शन, चिकित्सा, शिक्षा और जीवन जीने की कला सम्मिलित है। यह प्रणाली हमें अपने सनातन मूल्यों से संयुक्त करती है और जीवन में संतुलन बनाए रखने की शिक्षा देती है। हमारे ग्रंथ वेद, उपनिषद, गीता, आयुर्वेद, योग, ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, प्राकृतिक चिकित्सा इत्यादि के माध्यम से न केवल भारतीय ज्ञान परंपरा से देश की युवा पीढ़ी सहित संपूर्ण समाज लाभान्वित होता है, अपितु वैश्विक स्तर पर भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल्यों के प्रचार-प्रसार से देश गौरवान्वित हो रहा है।

वस्तुतः उच्च शिक्षा का मूल उद्देश्य भी यही है कि युवा पीढ़ी को केवल पुस्तकीय ज्ञान और डिग्री मात्र ही न प्रदान की जाए, अपितु देश के इन कर्णधारों में सनातन मूल्यों का आधान करते हुए उनमें कठिन से कठिन परिस्थिति में भी धैर्य एवं दृढ़ता से चुनौतियों का सामना करने की आदत डाली जाए और उनके शरीर, मन और आत्मा का संतुलित एवं सम्यक् विकास किया जाए। उन्हें ज्ञान के साथ जीवनोपयोगी कौशल प्रदान करके नैतिक मूल्यों, संस्कारों, स्वानुशासन, आत्मनिर्भरता, सामाजिक विकास व नवाचार के द्वारा राष्ट्रीय प्रगति तथा मानवता की सेवा के लिए तैयार किया जाए।

हमारा महाविद्यालय विगत 42 वर्षों से बालिकाओं की शिक्षा के लिए समर्पित एक उच्चस्तरीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के रूप में स्थापित है, जिसमें आर्य समाज के मूल सिद्धांतों की रक्षा करते हुए संपूर्ण महाविद्यालय परिवार आज के चुनौतीपूर्ण समय में दक्षता, तत्परता एवं ईमानदारी के साथ उनके सम्यक् विकास हेतु निरंतर प्रयत्नशील है।

यत्र छात्रों के समुचित सर्वांगीण विकास में प्रबंधक, शिक्षक एवं अभिभावक का सम्मिलित प्रयास आशातीत सफलता का उदाहरण बन सकता है। अतः मुझे आशा ही नहीं, पूर्ण विश्वास है कि “संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्” इस वैदिक उद्घोष को आत्मसात करते हुए प्रशासन, शिक्षक और अभिभावक के सक्रिय सहयोग, आपसी सामंजस्य एवं सजगता से छात्राओं के व्यक्तित्व में सकारात्मक ऊर्जा, नवाचार एवं नवीन शिक्षा प्रणाली के उद्देश्यों को विकसित करके “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” सूत्रवाक्य को चरितार्थ करने में महाविद्यालय सफल होगा।

प्रो० सुरचना त्रिवेदी
प्राचार्य

प्रबंधक की कलम से

आर्य समाज के प्रवर्तक महर्षि दयानन्द सरस्वती की दी शिक्षा के उद्देश्य को समर्पित यह महाविद्यालय 42 वर्षों से निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर हो रहा है।

मुझे प्रसन्नता है कि आर्य स्त्री समाज के द्वारा संचालित महाविद्यालय में सेवा का अवसर प्राप्त हुआ। मेरा निरंतर प्रयास रहा है कि जनपद में एक मात्र महिला महाविद्यालय में छात्राओं के लिए रोजगार परक शिक्षा उपलब्ध हो सके, साथ ही छात्राओं को भोग एवं उपयोगी विषयों की शिक्षा प्रदान हो सके। इस पुनीत कार्य में शाहजहाँपुर की जनता का सहयोग प्राप्त हो रहा है।

महाविद्यालय के 42वें वर्ष में छात्राओं को व्यावसायिक व जीविकोपार्जन शिक्षा उपलब्ध हो सके, इसके लिए महाविद्यालय का प्रबंधन कृत संकल्प है। इस पुनीत कार्य में आप सभी का सहयोग सदैव की भाँति इस वर्ष भी अपेक्षित है।

महाविद्यालय के नये सत्र में छात्राओं, अभिभावकों, जनपद के जनप्रतिनिधियों, नागरिकों, विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षा के समस्त प्रतिनिधियों का महाविद्यालय में हार्दिक स्वागत है।